श्रीकृष्ण गौशाला की स्थापना संत शिरोमणी साईं लीलाशाह महाराज जी ने सौरो कटरा , शाहगंज मे  सन 1954 में की | गौशाला का शुभारम्भ मात्र 8 गाय से किया था |

आज गौशाला मे लगभग 300 गौवंश है | इनमे केवल 20 से 25 गाय ही दुधारू है समस्त गौवंश की सेवा की जाती है आज गायों के चारे के भाव आसमान छू रहे है | गौवंश का दैनिक खर्चा महंगाई के दौर में बढ़ता जा रहा है | फिर भी ईश्वर की असीम कृपा से एवं श्रद्धालु के सहयोग से गौवंश की सेवा में किसी प्रकार की कमी नही रहती है | गौशाला परिसर में गौवंश का पालन गौशाला कमेटी सुचारू रूप से चला रही है | गायो का संरक्षण देने और सेवा करना गौशाला का मुख्य उद्देश्य है|

हमारी प्रार्थना है की आप इस पावन कार्य में अपना बहुमुल्य सहयोग तन, मन, धन से करे | श्रीमद् भागवत में कहा गया है की जो भक्त एक वर्ष तक प्रतिदिन भोजन करने से पहले गाय को एक मुट्ठी घास या भोजन खिलाता है| उसकी समस्त मनोकामना पूरी होती है| उसे कीर्ति यश धन प्राप्त होता है| उसके समस्त दुखो का नाश होकर सुख समृधि प्राप्त होती है|

गावो विश्वस्थ मातर:

” श्रीवेद भगवान ने भी गावो विश्वस्थ मातर: “

गाय तो विश्‍व की माता है,  ऐसा कहा है | प्रत्येक श्रद्धालु के  घर में पहली रोटी गौमाता के लीये बनती है व अंश सभी देवी-देवताओ को चला जाता है | गौमाता से बढ़कर न कोई देव स्थान है , न कोई तीर्थ न कोई योग, यज्ञ है न कोई जप,  तप है, न कोई कल्याण मार्ग है और न कोई मोक्ष का साध है | गौ सेवा जिस घर में ब्रजधाम वहा पर | गौ सेवा जिस घर में हो सुखधाम वहा पर |